भलकू रेल यात्रा 2025

हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा आयोजित बाबा भलकू स्मृति कालका शिमला साहित्य रेल यात्रा 12 और 13 अप्रैल, 2025 को हुआ जिसमें देश के विभिन्न भागों से 33 लेखक शामिल हुए ।  शिमला रेलवे स्टेशन पर सभी लेखकों का हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री जी श्री धनी राम शांडिल्य जी द्वारा सम्मान और स्वागत किया गया। 

 इस तरह 12 अप्रैल को लेखक शिमला से बड़ोग के लिए रवाना हुए। और शाम को शिमला लौट आए। दूसरे दिन बस से यह यात्रा कुफरी चायल से होती हुई भलकू के पुश्तैनी गांव झाजा पहुंची जहां लेखक भलकू के परिजनों को मिले और उन्हें सम्मानित भी किया चायल में हिमाचल पर्यटन विकास निगम के हेरिटेज पैलेस चायल का भ्रमण भी हम सब लेखकों को उत्साहित करने वाला रहा। रेल यात्रा के दूसरे दिन झाजा गांव में भी एक गोष्ठी की गई। साथ ही भलकू की स्मृतियों को सहेजने के महत्वपूर्ण कार्य के लिए वरिष्ठ रंगकर्मी लेखक बी आर मेहता के साथ भलकू की छठी पीढ़ी के परिजनों दुर्गा दत्त, कांति ठाकुर, रामस्वरूप ठाकुर और सुशील कुमार ठाकुर को सम्मानित किया गया। 

  

कालका शिमला रेल वर्ष 9 नवंबर, 1903 को शुरू हुई थी। और वर्ष 2008 में इसे यूनेस्को ने धरोहर रेल घोषित किया था। यह 96 किलोमीटर कालका से शिमला तक नैरो गेज लाइन है जो छोटी बड़ी 103 सुरंगों से गुजरती हुई शिमला पहुंचती है। इस पटरी पर 869 पुल और 919 घुमाओ आते हैं। कालका से शिमला तक 12 लोकप्रिय स्टेशन हैं। पहाड़ी गांव और देवदार तथा बान के जंगलों से गुजरती यह खिलौना रेलगाड़ी प्राकृतिक सौंदर्य का अदभुत मिश्रण है।

 भलकू एक निरक्षर दिव्य शक्तियों का मालिक मजदूर था जिसने शिमला से किन्नौर तक हिंदुस्तान तिब्बत सड़क के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सतलुज पर कई पुलों के बनाने में मदद की। बाद में जब अंग्रेज कालका शिमला रेल के लिए पटरी के सर्वेक्षण में असफल हुए तो भलकू ने ही परवाणू से शिमला तक न केवल सर्वे किया बल्कि बड़ोग जैसी सर्वाधिक लंबी सुरंग के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाई। यही कारण रहा कि रेलवे ने ओल्ड बस स्टैंड के साथ भलकू की स्मृति में एक म्यूजियम की स्थापना भी की। मशोबरा के साथ जो लिंक रोड ठियोग की तरफ निकलता है उसका नाम ही भलकू रोड है।

यात्रा में शामिल होने वाले लेखकों में मुंबई से प्रो.हूबनाथ पांडेय, रमण मिश्र, डॉ.अर्जुन परत, डॉ.प्रमोद यादव, डॉ. शशि श्रीवास्तव, बिहार पटना से ई. एस पी सिंह, मध्य प्रदेश गुना से मधुर कुलश्रेष्ठ और नीलम कुलश्रेष्ठ, कानपुर से राजेश आरोड़ा, फिरोजपुर से हरीश मोंगा,  चंडीगढ़ से सुनैनी शर्मा, किरतपुर पंजाब से सीमा गौतम,  सुंदर नगर से प्रियंवदा शर्मा, कांगड़ा से रचना पठानिया, बिलासपुर से अनिल शर्मा नील, सोलन से अंजू आनंद, कुमारसैन से जगदीश बाली और हितेंद्र शर्मा, शिमला से डॉ.विजय लक्ष्मी नेगी, सलिल शमशेरी, दक्ष शुक्ला, स्नेह नेगी, जगदीश कश्यप, लेखराज चौहान, दीप्ति सारस्वत, डॉ. देव कन्या ठाकुर, वंदना राणा, हेमलता, शांति स्वरूप शर्मा, वीरेंद्र कुमार, जगदीश गौतम, ओम प्रकाश और यादव चंद जी शामिल रहे। 

इस यात्रा के दौरान चलती रेल  और बस में ही गोष्ठियों के सत्र चलते रहे। जिसने इस यात्रा को रोमांचकारी बना दिया ।